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बिहार में 1 अप्रैल से बिजली बिल का नया खेल शुरू, दिन में राहत और शाम को जेब पर बढ़ेगा बोझ
- Reporter 12
- 01 Apr, 2026
बिहार में 1 अप्रैल 2026 से स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के लिए टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ लागू हो गया है। अब सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली सस्ती, शाम 5 से रात 11 बजे तक महंगी और रात 11 से सुबह 9 बजे तक सामान्य दर पर मिलेगी। जानिए नया नियम, बिल का गणित और बचत का आसान तरीका।
पटना: बिहार में 1 अप्रैल से बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव लागू हो गया है। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ अब राज्य में स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं का बिजली बिल सिर्फ यूनिट के हिसाब से नहीं, बल्कि समय के हिसाब से भी तय होगा। यानी अब यह देखना जरूरी होगा कि आपने बिजली किस समय इस्तेमाल की। अगर दिन में ज्यादा उपयोग किया तो राहत मिलेगी, लेकिन शाम के समय ज्यादा खपत होने पर जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
राज्य सरकार ने टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ लागू कर दिया है, जिसके तहत दिन, शाम और रात के लिए अलग-अलग बिजली दरें तय की गई हैं। ऊर्जा विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था का मकसद शाम के पीक आवर में बिजली की खपत कम करना और लोगों को दिन के समय अधिक बिजली इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना है। हालांकि आम उपभोक्ता के लिए इसका सीधा मतलब यही है कि अब बिजली का बिल समझने के लिए सिर्फ मीटर रीडिंग नहीं, बल्कि बिजली इस्तेमाल का समय भी अहम होगा।
अब समय देखकर खर्च करनी होगी बिजली
नई व्यवस्था के तहत राज्य में बिजली खपत को तीन हिस्सों में बांटा गया है। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक का समय ऑफ-पीक आवर माना गया है, जिसमें बिजली सस्ती मिलेगी। शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक का समय पीक आवर घोषित किया गया है, जहां बिजली महंगी होगी। वहीं रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक सामान्य दर लागू रहेगी।
सीधे शब्दों में समझें तो अब सरकार चाहती है कि लोग दिन के समय ज्यादा बिजली इस्तेमाल करें और शाम के व्यस्त समय में भारी उपकरणों का उपयोग कम करें। क्योंकि शाम का समय वह होता है जब अधिकतर घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में बिजली की खपत एक साथ तेजी से बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस स्लॉट को सबसे महंगा बनाया गया है।
किस समय कितनी दर लगेगी, समझिए आसान भाषा में
नई व्यवस्था के तहत सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली पर 20 प्रतिशत तक छूट मिलेगी। इस अवधि में प्रति यूनिट दर करीब 5.94 रुपये तय की गई है। इसका मतलब यह है कि अगर आप दिन में बिजली से चलने वाले ज्यादा खपत वाले उपकरणों का उपयोग करते हैं, तो आपके बिल में राहत मिल सकती है।
इसके उलट शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक बिजली इस्तेमाल करना महंगा पड़ेगा। इस समय बिजली की दर सामान्य से 10 प्रतिशत ज्यादा होगी और प्रति यूनिट दर करीब 8.16 रुपये तक पहुंचेगी। यह वही समय है जब घरों में सबसे ज्यादा बिजली खर्च होती है—लाइट, पंखा, टीवी, फ्रिज, किचन उपकरण, चार्जिंग, मोटर और कई घरेलू मशीनें एक साथ चलती हैं। ऐसे में यही समय अब सबसे महंगा साबित होगा।
वहीं रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक बिजली सामान्य दर पर मिलेगी। इस दौरान प्रति यूनिट दर लगभग 7.42 रुपये रहेगी। यानी न तो इस समय कोई अतिरिक्त छूट मिलेगी और न ही अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
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अब 87 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर
बिहार में स्मार्ट प्रीपेड मीटर का दायरा तेजी से बढ़ा है और अब इस नई व्यवस्था का असर करीब 87 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। यानी शहरी इलाकों से लेकर कस्बों और कई छोटे शहरों तक बड़ी संख्या में लोग अब इस नए बिजली बिल फॉर्मूले के तहत आएंगे।
बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने बिजली वितरण कंपनियों की मांग पर इस व्यवस्था को मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि यह सिर्फ एक प्रयोग नहीं, बल्कि अब औपचारिक रूप से लागू मॉडल है। आने वाले समय में उपभोक्ताओं को अपने घरेलू बिजली उपयोग की आदतों में बदलाव करना पड़ सकता है।
अब तक लोग बिजली बिल कम करने के लिए सिर्फ कम यूनिट खर्च करने पर ध्यान देते थे, लेकिन अब उन्हें यह भी देखना होगा कि उसी यूनिट को किस समय खर्च करना ज्यादा फायदेमंद है।
किन लोगों को फायदा, किन्हें हो सकता है नुकसान
इस नई व्यवस्था का असर हर घर पर एक जैसा नहीं पड़ेगा। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि किसी परिवार या उपभोक्ता की बिजली खपत का सबसे बड़ा हिस्सा दिन में है या शाम में।
जिन घरों में दिन के समय लोग मौजूद रहते हैं, घरेलू कामकाज सुबह से शाम के बीच होता है और पानी की मोटर, वॉशिंग मशीन, गीजर, इस्त्री या अन्य भारी उपकरण दिन में चलाए जाते हैं, उन्हें इस नई व्यवस्था में राहत मिल सकती है। छोटे ऑफिस, दुकानें और वे प्रतिष्ठान जहां दिन के समय ज्यादा बिजली उपयोग होती है, वे भी इस बदलाव का फायदा उठा सकते हैं।
लेकिन जिन परिवारों में अधिकतर सदस्य नौकरी या काम के कारण दिनभर बाहर रहते हैं और शाम को लौटकर एक साथ ज्यादा बिजली खर्च होती है, उनके लिए यह नियम महंगा साबित हो सकता है। खासकर ऐसे घर जहां शाम के समय किचन उपकरण, टीवी, कूलर, पंखा, चार्जिंग, मोटर और अन्य घरेलू मशीनें एक साथ चलती हैं, वहां बिल बढ़ने की आशंका ज्यादा रहेगी।
बिल बचाना है तो बदलनी होगी बिजली इस्तेमाल की आदत
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उपभोक्ता नई व्यवस्था को समझदारी से अपनाएं, तो वे अपने बिजली बिल में अच्छी बचत कर सकते हैं। इसके लिए सबसे जरूरी बात यह है कि ज्यादा बिजली खाने वाले उपकरणों को दिन के समय चलाया जाए।
सरल भाषा में कहें तो वॉशिंग मशीन, पानी की मोटर, गीजर, इस्त्री, इंडक्शन, हीटर और वैक्यूम क्लीनर जैसे भारी उपकरण दिन में चलाना ज्यादा फायदेमंद रहेगा। अगर यही उपकरण शाम 5 बजे से रात 11 बजे के बीच ज्यादा इस्तेमाल किए गए, तो महीने के अंत में बिल अपेक्षा से ज्यादा आ सकता है।
यानी अब बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए सिर्फ “कम बिजली खर्च करना” ही नहीं, बल्कि “सही समय पर बिजली खर्च करना” भी उतना ही जरूरी हो गया है।
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सरकार का तर्क: ग्रिड पर दबाव कम होगा
ऊर्जा विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था सिर्फ बिल बढ़ाने या घटाने के लिए नहीं, बल्कि बिजली व्यवस्था को संतुलित करने के लिए लाई गई है। शाम के समय पूरे राज्य में बिजली की मांग अचानक बहुत बढ़ जाती है। ऐसे में ग्रिड पर दबाव पड़ता है और आपूर्ति संतुलित बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
ToD टैरिफ के जरिए सरकार चाहती है कि उपभोक्ता अपनी बिजली खपत को थोड़ा-बहुत समय के अनुसार बांटें। अगर ज्यादा लोग दिन के समय भारी उपकरण चलाएंगे, तो शाम का लोड कम होगा और पूरे सिस्टम पर दबाव घटेगा। तकनीकी रूप से यह मॉडल कई राज्यों और देशों में पहले से अपनाया जा चुका है, लेकिन आम उपभोक्ता के लिए इसका असर अब सीधे जेब पर महसूस होगा।
कुछ स्लैब में राहत भी दी गई है
नई व्यवस्था के साथ घरेलू और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के कुछ बिजली स्लैब को भी एकीकृत किया गया है। इसके कारण कई उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 42 पैसे से लेकर 1.53 रुपये तक की राहत मिलने की संभावना बताई जा रही है।
हालांकि यह राहत सभी पर एक जैसी लागू नहीं होगी। कुछ उपभोक्ताओं को स्लैब में राहत मिलेगी, लेकिन अगर उनकी शाम की खपत ज्यादा रही, तो कुल बिल फिर भी बढ़ सकता है। यानी इस नए सिस्टम में सिर्फ दरों को देखना काफी नहीं होगा, बल्कि पूरे महीने की उपयोग शैली को समझना होगा।
शहर और गांव में असर अलग-अलग दिख सकता है
इस बदलाव का असर शहरी और ग्रामीण इलाकों में थोड़ा अलग दिखाई दे सकता है। शहरों में जहां शाम के समय बिजली की खपत ज्यादा होती है, वहां इसका असर अधिक महसूस होगा। वहीं कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जहां दिन के समय घरेलू कामकाज ज्यादा होता है, वहां कुछ परिवारों को राहत भी मिल सकती है।
हालांकि यह पूरी तरह परिवार की जीवनशैली, दिनचर्या और उपकरणों के उपयोग पर निर्भर करेगा। यानी एक ही मोहल्ले में दो घरों का बिजली बिल अलग-अलग तरीके से प्रभावित हो सकता है।
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1 अप्रैल से जेब पर कई मोर्चों पर असर
नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ बिहार में सिर्फ बिजली बिल का नियम ही नहीं बदला, बल्कि कई अन्य फैसलों का असर भी लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। जमीन के सर्किल रेट, ईंधन से जुड़े बदलाव और अन्य आर्थिक फैसलों के बीच बिजली की यह नई व्यवस्था भी आम आदमी के मासिक खर्च का बड़ा हिस्सा बन सकती है।
यही वजह है कि यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नियम नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने वाला फैसला है। आने वाले दिनों में लोगों को यह समझ में आ जाएगा कि यह नया सिस्टम उनके लिए राहत लेकर आया है या अतिरिक्त बोझ।
निष्कर्ष: अब बिहार में बिजली का बिल समय देखकर बनेगा
1 अप्रैल से बिहार में लागू हुई टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ व्यवस्था ने साफ कर दिया है कि अब बिजली का बिल सिर्फ यूनिट से नहीं, बल्कि समय से भी तय होगा। दिन में बिजली सस्ती, शाम को महंगी और रात/सुबह सामान्य दर पर मिलने का सीधा असर लाखों परिवारों की जेब पर पड़ेगा।
जो उपभोक्ता दिन के समय ज्यादा बिजली खर्च करेंगे, उन्हें राहत मिलेगी। वहीं जो लोग शाम के पीक आवर में भारी उपकरणों का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, उनके लिए यह व्यवस्था महंगी साबित हो सकती है। ऐसे में अब बिजली बचत का नया फॉर्मूला यही है—
“समय देखकर बिजली खर्च करें, तभी बिल पर काबू रहेगा।”
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